Disha De-Addiction Cum Rehabilitation Center

नशे का परिचय

Facts Sharing About Addiction

नशीले पदार्थ क्या हैं?

नशीले पदार्थ उन पदार्थों को कहते हैं जो सेवन के उपरांत व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक अवस्था को परिवर्तित करते हैं। इस प्रकार के अधिकतर पदार्थों का उपयोग शारीरिक और मानसिक चिकित्सा में किया जाता है। परंतु इस प्रकार के कई पदार्थ का उसके मानसिक प्रभाव के कारण चिकित्सकीय व्यवस्था के बाहर भी उपयोग किया जाता है। इनमें से अधिकतर पदार्थ ग़ैरक़ानूनी होते हैं। अपने मानसिक प्रभाव के कारण अर्थात् तंत्रिका तंत्र पर असर के कारण इन पदार्थों को मनोसक्रिय पदार्थ भी कहा जाता है। शराब,कैफ़िन (चाय – कॉफ़ी इत्यादि) तथा निकोटिन (तम्बाकू तथा उससे बनने वाले पदार्थ) पूरे विश्व में सबसे ज़्यादा उपयोग किए जाने वाले मनोसक्रिय पदार्थ हैं।

सामान्यतया सबसे ज़्यादा उपयोग किए जाने वाले नशीले पदार्थ

 

 

 



 



नशे का इस्तेमाल कब एक समस्या बन जाती है?

हानिकारक और नकारात्मक परिणाम तथा नशे पर से नियंत्रण का ख़त्म हो जाना यह संकेत करता है कि नशा एक समस्या का रूप धारण कर चुकी है।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग की परिभाषा

किसी भी ग़ैर क़ानूनी या डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवाओं का नियमित रूप से एक साल या उससे अधिक समय से, उस दवा या नशीले पदार्थ का जीवन पर बुरे या नकारात्मक परिणाम के वाबजूद, सेवन जारी रखने को नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के रूप में परिभाषित किया जाता है।

नशे के बुरे या नकारात्मक परिणामों की पहचान

नशे की समस्या से ग्रसित होने के चरण





किसी व्यक्ति को यह कैसे पता चलेगा कि वह नशे की समस्या से ग्रस्त हो चुका है?

 













उपरोक्त एक या एक से ज़्यादा सवालों का उत्तर यदि हाँ है तो आप नशे की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति हैं।

नशे के इस्तेमाल के सूचक

 




















नशे के मानसिक प्रभाव







 


नशे के शारीरिक प्रभाव

 








नशे के सामाजिक प्रभाव








नशे की लत एक बीमारी है, इसका उपचार हो सकता है लेकिन यह ठीक नहीं हो सकता है।

सह निर्भरता

नशे के शुरुआती दौर में परिजन अपने स्तर पर नशे की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति को नशामुक्त करने का असफल प्रयास करते हैं। इस प्रयास में नशे के आदि व्यक्ति को बाहर निकलने से रोका जाता है, उसके नशे की मात्रा को परिजन ख़ुद के प्रयास से कम करने का प्रयास करते हैं, उसे बड़े नशों के बजाय सिर्फ़ तम्बाकू का सेवन करने को कहा जाता है। परंतु बिना किसी व्यावसायिक उपागम के बिना ये सारे प्रयास असफल हो जाते हैं। यदि अभिभावक नशे के शुरुआती दौर में ही व्यावसायिक सहायता लेलें तो नशे की समस्या बहुत व्यापक और जटिल रूप धारण कर ही नहीं पाएगी।परिजनों का स्वयं के द्वारा किया गया यह असफल प्रयास व्यक्ति के नशे की समस्या की जटिलता को और बढ़ाता जाता है। परिजनों का यह गैरज़िम्मेदाराना रवैया सहनिर्भरता कहलाता है। बिना व्यावसायिक मदद के नशमुक्त हो पाना अत्यंत कठिन है।

नशामुक्त कैसे हों?








 ‘दिशा’ नशाविमुक्ति केंद्र की टीम के द्वारा आपका नशामुक्त जीवन में स्वागत किया जाता है।